सर्व-सम्मत | SARV-SAMMAT is a short story from the “Bodh Kathayen” 3rd Edition of the Hindi Stories book written by Dr. Madhukar Gangadhar, a Well known Senior Hindi Writer who was the Retd. Director of All India Radio.
He was the writer of around 100 Stories, Novels, Poems etc.
Zeal Zindagi with Sap is the Podcast by Sapna Jain. In this podcast समय चुराने की कला सीखें is all about to find your own time from your busy schedule.
समय चुराना एक कला है …
आपको ये सुनकर अटपटा ज़रूर लग रहा होगा कि आख़िर मैं ये बोल क्या रही हूँ , समय चुराना! किससे, क्यों, किसलिए यही आ रहा है ना मन में … और शायद ये भी आ रहा होगा मन में कि समय भी भला चुराने की कोई चीज़ है … समय देना, समय बिताना, समय के साथ जीना वग़ैरह वग़ैरह , ये सब तो सुना है लेकिन ये समय चुराना आख़िर कौन सा नया टर्म है
दोस्तों मैं हूँ सपना जैन । zeal zindagi with sap ज़रिए मैं आप सभी से जुड़ती हूँ और छोटे - छोटे इन हसीन पलों को जीने के लिए प्रेरित करती हूँ । आज के अपने इस पॉडकास्ट “समय चुराने की कला सीखें” में मैं आपको बताऊँगी कि समय चुराना वास्तव में है क्या, समय चुराना किससे है और कैसे है और समय चुराने के आख़िर फ़ायदे क्या हैं ।
देखो, समय के बारे में बहुत सी बातें हमने अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सुन रखी हैं । जैसे कि
⁃ समय बहुत बलवान है
⁃ समय ख़राब है
⁃ समय किसी के लिए रुकता नहीं है
⁃ समय बीता जा रहा है
तो इन सबके साथ ही हमें समय को लेकर एक और बात ऐड करनी है वो यही है कि “समय चुराना है” … किससे चुराना है अपने आप से ।
हम अपनी ज़िंदगी और इसके क्रिया-कलापों में इतने व्यस्त रहते हैं कि अपने लिए समय निकाल ही नहीं पाते । सुबह से रात, दिन से दोपहर और शाम, हफ़्ते, महीने, साल सब चुटकी बजाते छू मंतर हो जाते हैं और हम जब कभी कभार बैठते हैं तो लगता है कि ओह ये करना था , ऐसा करने की सोचा था , ये छूट गया, ये रह गया । अब बस ये सोचना बंद करिए और समय चुराना शुरू करिए हर रोज़ । फिर आपकी ये सारी शिकायतें बंद हो जायेंगी । अपने पूरे दिन के शेड्यूल में कुछ समय चोरी से छिपा लीजिये सिर्फ़ अपने लिए और उस समय को सिर्फ़ ख़ुद के साथ इंजॉय करिए, अपने शौक़ को पूरा कीजिए, अपने सपनों को आकार दीजिए , ख़ुद को आराम दीजिये या फिर जो मन में आये उसे करिए, लेकिन ध्यान दीजिये कि उस चोरी किए हुए समय में किसी और की एंट्री बिलकुल भी नहीं है यहाँ तक कि सोच में भी नहीं । ज़्यादा टिपिकल हो गया क्या ? (हसीं) … बिलकुल भी नहीं । आप एक बार ऐसा करके तो देखिए । इसका मज़ा अलग आएगा और ज़िंदगी जीने का आनंद अलग । फिर आप मुझसे कभी नहीं कहेंगे कि टिपिकल है बल्कि आप समय चुराने का समय और बढ़ा देंगे ।
तो देर किस बात की । आज से ही समय चुराना सीखें । डरिए मत पुलिस नहीं आयेगी क्योंकि ये आपका ही अपना समय है … चुरा सकते हैं ।
दरख़्त | DARAKHT is a short story from the “Bodh Kathayen” 3rd Edition of the Hindi Stories book written by Dr. Madhukar Gangadhar, a Well known Senior Hindi Writer who was the Retd. Director of All India Radio.
He was the writer of around 100 Stories, Novels, Poems etc.
Zeal Zindagi with Sap is the Podcast by Sapna Jain. In this podcast ज़िंदगी इतनी भी मुश्किल नहीं is motivating you to see your life again and check this is not much hard.
ज़िंदगी इतनी भी मुश्किल नहीं जितनी हमने समझ रखी है । पहले ज़िंदगी को ठीक तरीक़े से समझो तो ।
दोस्तों मैं हूँ सपना जैन zeal zindagi with sap के ज़रिए मैं आपको ज़िंदगी जीने के लिए प्रेरित करती हूँ । तो अगर आपको भी मेरा ये पॉडकास्ट सुनकर ज़िंदगी को ज़िंदादिली से जीने का मन करने लगे तो मेरा मक़सद इस पॉडकास्ट को करने का पूरा हो जाये ।
आज की तेज रफ़्तार ज़िंदगी में रोज़ ही कुछ नया इन्वेंशन होता रहता है और हम नयी नयी टेक्नोलॉजी को अपनाते रहते हैं । कुछ तो इसे सीखने में तेज होते हैं लेकिन कुछ “पुराना ही सही है” कहकर नया सीखने से बचते हैं । लेकिन उन्हें ये पता नहीं होता है कि आज जिसे सीखने में परेशानी होगी ये सोचकर हम सीखने के लिए लालायित नहीं है, असल में उसे सीखने से काफ़ी कुछ आसान हो जाएगा।
यही करते हैं हम ज़िंदगी के साथ। ज़िंदगी को सीखने और समझने के बजाय हम अक्सर ज़िंदगी को टफ़ मानकर इसे समझने की कोशिश ही नहीं करते हैं और बेवजह अपने को परेशान करते रहते हैं । दरअसल जिन परेशानियों को हमने मुश्किलें मान रखा है, वो असल में परेशानी हैं ही नहीं बल्कि ज़िंदगी के पड़ाव हैं जिनसे होकर हमें आगे निकलना है। लेकिन हम उससे निकलने के बजाय करते क्या हैं ? हम उसी में उलझे रहते हैं । लेकिन जिस दिन हमने परेशानी में उलझे रहने के बजाय उससे निकलने का रास्ता निकाल लिया ना उस दिन से ज़िंदगी में कोई परेशानी लगेगी ही नहीं ।
वैसे भी ज़िंदगी एक बहाव की तरह है जिसके साथ बहकर आप नज़ारों का आनंद ले सकते हैं और ज़िंदगी को आसान बना सकते हैं । लेकिन हम करते क्या हैं , हम ज़िंदगी के बहाव के साथ बहने के बजाय हाथ-पैर मारते रहते हैं इसके बहाव को रोकने की, या फिर कोशिश करते रहते हैं कि किसी तरह कोई किनारा मिल जाये, या फिर कुछ ऐसा मिल जाये जिसे पकड़ कर हम लटक जायें और इस बहाव से पार पा जायें और जब कुछ नहीं समझ आता है तो हम बहाव के अपोजिट् डायरेक्शन में बहने की जद्दोजेहद करने लगते हैं और यही से हमारी परेशानी की शुरुआत हो जाती है ।
असल में हमें कुछ करना ही नहीं है । ज़िंदगी अपनी रफ़्तार में चल रही है, बह रही है। हमें सिर्फ़ उस बहाव के साथ बहते रहना है और ज़िंदगी का आनंद लेना है । ये करना बहुत ही आसान है।
एक बार ज़िंदगी से शिकायत करने के बजाय उसको अप्रीसियेट करके तो देखो । ज़िंदगी ना की सिर्फ़ आसान हो जाएगी बल्कि बहुत ही खूबसूरत हो जाएगी ।
सन्नाटा | SANNATA is a short story from the “Bodh Kathayen” 3rd Edition of the Hindi Stories book written by Dr. Madhukar Gangadhar, a Well known Senior Hindi Writer who was the Retd. Director of All India Radio.
He was the writer of around 100 Stories, Novels, Poems etc.